क्या WhatsApp, Telegram और अन्य मैसेंजर ऐप्स पर लागू होने वाले नए नियम आपका अनुभव बदल देंगे? जानिए पूरी जानकारी!

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भारत में सोशल मीडिया और मैसेंजिंग एप्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat जैसे एप्स रोजाना करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में सरकार ने इन एप्स के लिए कुछ नए नियम लागू किए हैं, जिनका असर उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा। ये बदलाव खासकर आपके मोबाइल अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं। तो चलिए जानते हैं, इन नए नियमों के बारे में विस्तार से और कैसे ये आपके मैसेंजिंग ऐप्स के उपयोग को बदल सकते हैं।

क्या है नया नियम?

नए आदेश के अनुसार, अब WhatsApp, Signal, Telegram जैसे सभी ऐप्स केवल उस सिम कार्ड के साथ काम करेंगे जो आपके मोबाइल में सक्रिय होगा। यानी अगर आपके पास जो नंबर WhatsApp या Telegram पर रजिस्टर्ड है, उसके लिए अगर सिम कार्ड मोबाइल में नहीं होगा, तो वह ऐप काम नहीं करेगा। यह नियम सिर्फ भारत में लागू होगा और इसका उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना है। इस बदलाव से जुड़े टेलीकॉम कंपनियों को भी नए निर्देश दिए गए हैं, जो 120 दिनों के अंदर लागू होने होंगे।

सिम बाइंडिंग सिस्टम क्या है?

अब से, WhatsApp, Telegram, Signal जैसे मैसेंजर एप्स सिम बाइंडिंग सिस्टम के तहत काम करेंगे। इसका मतलब है कि केवल वही सिम कार्ड आपके ऐप को एक्टिव रख सकेगा, जो उस एप्लिकेशन के रजिस्टर्ड नंबर से जुड़ा हुआ है। अगर आपने सिम निकाल लिया और वह सिम एक्टिव नहीं है, तो ऐप्स भी बंद हो जाएंगे। ऐसा ही सिस्टम Google Pay, Paytm जैसी एप्स में पहले से लागू है।

डेस्कटॉप और वेब ऐप्स पर क्या असर होगा?

अक्सर हमने देखा है कि WhatsApp को हम डेस्कटॉप या वेब पर भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब इस पर भी नए नियम लागू होंगे। यदि आपके मोबाइल में सक्रिय सिम कार्ड नहीं है, तो डेस्कटॉप या वेब पर भी आपका WhatsApp लॉग आउट हो जाएगा। ये एक सुरक्षा उपाय है, जिससे साइबर फ्रॉड और अन्य खतरों को कम किया जा सके।

नए नियमों का उद्देश्य

सरकार का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और सिम कार्ड आधारित धोखाधड़ी (fraud) को रोकना है। जैसे कि स्पैम कॉल्स, फर्जी कॉल्स, और साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, इन नए नियमों के माध्यम से उन्हें नियंत्रित किया जाएगा। इसके अलावा, सरकार का मानना है कि इस तरह के नियम से विदेशी साइबर हमलों और अन्य धोखाधड़ी को कम किया जा सकेगा।

90 दिन का समय और कंपनियों की जिम्मेदारी

भारत सरकार नेWhatsApp सभी कंपनियों को यह नियम लागू करने के लिए 90 दिन का समय दिया है। इस दौरान, कंपनियों को अपने सिस्टम को अपडेट करना होगा और रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। यदि कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करतीं, तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जा सकती है।

प्रीइंस्टॉल्ड साइबर सुरक्षा ऐप

इसके अलावा, एक और नया आदेश जारी किया गया है जिसमें सभी स्मार्टफोन्स में सरकार का साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी’ प्रीइंस्टॉल्ड होगा। यह ऐप फोन चोरी होने या खो जाने की स्थिति में उसकी ट्रैकिंग करेगा। सरकार का कहना है कि इस ऐप के जरिए अब तक लाखों फोन रिकवर हो चुके हैं।

विपक्ष और सरकार के बीच विवाद

इस नए नियम को लेकर विपक्ष ने अपनी चिंता व्यक्त की है। कुछ नेताओं का कहना है कि यह सरकार की तरफ से जासूसी का एक तरीका हो सकता है, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार किया है। इस ऐप का उद्देश्य केवल सुरक्षा बढ़ाना है और इसे उपयोगकर्ता की सहमति से हटाया भी जा सकता है।

नतीजा क्या होगा?

इन नए नियमों का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को बढ़ाना और मोबाइल ऐप्स का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। हालांकि, ये नियम उपयोगकर्ताओं के अनुभव को थोड़ा बदल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में यह सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद साबित होगा।

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